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POST/api/astro/strength/1 क्रेडिट

षड्बल और ग्रह बल

षड्बल, यानी “छह बल”, यह संख्या में आँकने का शास्त्रीय तरीका है कि कोई ग्रह असल में कितना फल दे सकता है। छह स्रोतों के अंक अलग-अलग निकाले जाते हैं — स्थान, काल, दिशा, गति, नैसर्गिक श्रेणी और मिलने वाली दृष्टियाँ — और फिर जोड़ दिए जाते हैं। कुल योग विरूप में होता है, और साठ विरूप का एक रूप होता है; हर ग्रह के लिए रूप में एक न्यूनतम सीमा तय है, और ग्रह को मिले अंकों का उसकी ज़रूरत से अनुपात ही असल काम का उत्तर है। यह एंडपॉइंट वह कुल योग, उसका हर घटक और उप-घटक, और कई संबंधित बल पद्धतियाँ देता है। शुरुआत `shad_bala` से करें। यह नौ आइटम का ऐरे लौटाती है: छह घटकों की सूचियाँ, फिर विरूप में कुल योग, वही योग रूप में, और आख़िर में हर ग्रह के रूप को उसकी ज़रूरत से भाग देकर मिला अनुपात (सूर्य 5, चंद्रमा 6, मंगल 5, बुध 7, बृहस्पति 6.5, शुक्र 5.5, शनि 5)। अनुपात 1 से ऊपर हो तो ग्रह ने अपनी ज़रूरत पूरी कर ली। इस एंडपॉइंट की सात आइटम वाली हर सूची सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि के क्रम में है; बारह आइटम वाली हर सूची भाव एक से बारह तक है। `date_time`, `latitude`, `longitude` और `timezone` भेजें। ध्यान दें कि यहाँ फ़ील्ड का नाम `timezone` है, `timezone_as_float` नहीं, जैसा ज़्यादातर दूसरे एंडपॉइंट में है। `asc_house` ज़रूरी है, पर इसका इस्तेमाल केवल भावों का वर्गीकरण करने वाली तीन keys करती हैं; और `planet_index`, `include_houses` व `use_epoch_table` का इस्तेमाल केवल वही keys करती हैं जिनमें इनका नाम है। षड्बल के साथ यह एंडपॉइंट ताजिक पंचवर्गीय और द्वादशवर्गीय बल, इष्ट फल (शुभ अंक), रश्मि माप और हर्ष बल भी देता है। भाव बल, यानी ग्रहों का नहीं बल्कि भावों का बल, key सूची में है, पर इसके तीनों घटक अभी अधूरे स्टब हैं जो शून्य लौटाते हैं, इसलिए `bhava_bala` भी शून्य ही लौटाती है।

https://api.occultapi.com/api/astro/strength/
अनुरोध आज़माएँ

ऑथेंटिकेशन

अपनी कुंजी X-API-Key हेडर में भेजें। कुंजी सिर्फ़ सर्वर पर रखने की चीज़ है — इसे कभी ब्राउज़र के JavaScript या मोबाइल ऐप में न डालें।

X-API-Key: yt_live_a1b2c3d4_…
Content-Type: application/json

अनुरोध के फ़ील्ड

फ़ील्डटाइपज़रूरीटिप्पणी
asc_houseintegerज़रूरी
date_timestring (date-time)ज़रूरी

जिस क्षण की गणना करनी है, ISO 8601 फ़ॉर्मैट में। ऑफ़सेट या अंत में Z हमेशा लगाएँ - बिना ज़ोन वाली वैल्यू UTC नहीं, बल्कि Asia/Kolkata (UTC+05:30) मानी जाती है, और तब 200 के साथ पिछले दिन का नतीजा मिल सकता है। '2026-09-01T06:00:00Z' और '2026-09-01 06:00:00' दो अलग क्षण हैं, और इनके उत्तर भी अलग आते हैं।

keysarrayज़रूरी

कौन-सी गणनाएँ लौटानी हैं, उनके नामों की सूची। इस एंडपॉइंट की key तालिका देखें; एक भी अनजान नाम हो, तो पूरा अनुरोध अस्वीकार हो जाता है। आप जितनी चाहें keys माँगें, एक कॉल पर एक ही क्रेडिट लगता है, इसलिए कई कॉल करने के बजाय जो कुछ चाहिए, सब एक साथ माँग लें।

latitudenumber (double)ज़रूरी

स्थान का अक्षांश, दशमलव अंशों में। उत्तरी अक्षांश धनात्मक होता है, दक्षिणी ऋणात्मक। उदाहरण: जयपुर के लिए 26.9124, न्यूयॉर्क के लिए 40.7128। कला और विकला स्वीकार नहीं की जातीं - पहले दशमलव अंशों में बदल लें।

min -90 · max 90

longitudenumber (double)ज़रूरी

स्थान का देशांतर, दशमलव अंशों में। पूर्वी देशांतर धनात्मक होता है, पश्चिमी ऋणात्मक। उदाहरण: जयपुर के लिए 75.7873, न्यूयॉर्क के लिए -74.0060। चिह्न पर ध्यान दें: माइनस छूट गया, तो न्यूयॉर्क चीन में पहुँच जाएगा।

min -180 · max 180

timezonenumber (double)ज़रूरी

स्थान का UTC ऑफ़सेट, घंटों में, दशमलव संख्या के रूप में। उदाहरण: भारत के लिए 5.5 (UTC+05:30)। इसका अर्थ timezone_as_float जैसा ही है; दूसरे एंडपॉइंट इसी चीज़ को दूसरे नाम से लेते हैं।

min -12 · max 14

include_housesbooleanवैकल्पिक
planet_indexintegerवैकल्पिक
use_epoch_tablebooleanवैकल्पिक

उपलब्ध keys (50)

आपको जो गणनाएँ चाहिए, बस उन्हीं के नाम keys में लिखें। कोई एक भी अनजान नाम हुआ तो पूरा अनुरोध लौटा दिया जाता है। आप कितनी भी गणनाएँ माँगें, शुल्क 1 क्रेडिट ही लगता है — इसलिए सब एक साथ माँगें।

Keyऔर कौन-से फ़ील्ड चाहिएविवरण
abda_bala—वर्ष-स्वामी बल (अब्द बल): वर्ष के स्वामी ग्रह को 15 विरूप मिलते हैं, बाकी को शून्य। सूर्य से शनि तक सात मान लौटाती है, जिनमें ठीक एक मान 15 होता है। ध्यान दें कि यह इम्प्लीमेंटेशन वर्ष-स्वामी को `date_time` के वार से चुनता है; `abdadhipathi` शास्त्रीय ढंग से, बीते दिनों से वर्ष-स्वामी निकालती है, इसलिए उसी को प्राथमिकता दें।
abdadhipathi—वर्ष का स्वामी, जो वार से नहीं, शास्त्रीय ढंग से अहर्गण से निकाला जाता है — यानी किसी आधार युग से बीते दिनों की गिनती से। स्वामी ग्रह को 15 विरूप मिलते हैं, बाकी को शून्य। सूर्य से शनि तक सात मान लौटाती है, जिनमें ठीक एक मान 15 होता है। `abda_bala` की जगह इसी का इस्तेमाल करें।
apoklimasasc_houseचार आपोक्लिम भाव — 3रा, 6ठा, 9वाँ और 12वाँ — `asc_house` में भेजे गए लग्न भाव से गिनकर। चार पूर्णांक लौटाती है: n = 3, 6, 9 और 12 के लिए `(asc_house + n - 1) mod 12`, `panapharas` की तरह 0 से शुरू (zero-based)। भाव स्थिति के हिसाब से इन भावों में ग्रह सबसे कमज़ोर माने जाते हैं, इसीलिए केंद्र बल इन्हें सबसे कम अंक देता है।
ayana_bala—क्रांति बल, जो हर ग्रह की खगोलीय विषुवत से उत्तर या दक्षिण की दूरी पर आधारित है: क्रांति में 24 जोड़कर 1.25 से गुणा किया जाता है, और सूर्य का नतीजा दोगुना होता है। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक।
bhava_adhipathi_bala—भाव बल का भावाधिपति घटक: किसी भाव को उसके अपने स्वामी के बल से मिलने वाला हिस्सा। बारह संख्याएँ लौटाती है, भाव एक से बारह तक। फ़िलहाल यह अधूरा प्लेसहोल्डर है और शून्य ही लौटाता है।
bhava_bala—भाव बल, यानी ग्रहों का नहीं, भावों का बल, जो भावाधिपति, भाव दिग् और भाव दृग् बल से बनता है। तीन आइटम का ऐरे लौटाती है — विरूप में बारह मान, वही मान रूप में, और हर मान को न्यूनतम 5 रूप से भाग देकर मिला अनुपात — भाव एक से बारह तक। मौजूदा इंजन में इसके तीनों घटक अधूरे प्लेसहोल्डर हैं, इसलिए यहाँ का हर आँकड़ा अभी शून्य है।
bhava_dig_bala—भाव बल का दिशा घटक: भाव जिन विषयों से जुड़ा है, वे उसकी दिशा से मेल खाएँ तो भाव को मिलने वाला बल। बारह संख्याएँ लौटाती है, भाव एक से बारह तक। फ़िलहाल यह अधूरा प्लेसहोल्डर है और शून्य ही लौटाता है।
bhava_drik_bala—भाव बल का दृष्टि घटक: हर भाव पर पड़ने वाली शुभ और पाप दृष्टियों का शुद्ध योग। बारह संख्याएँ लौटाती है, भाव एक से बारह तक। फ़िलहाल यह अधूरा प्लेसहोल्डर है और शून्य ही लौटाता है।
bhava_madhya—बारह भाव मध्य, यानी भावों के मध्य बिंदु, जो निरयन भोगांश में Placidus कस्प से निकाले जाते हैं। अंशों में 0 से 360 तक की बारह संख्याएँ लौटाती है, पहले भाव से शुरू करके। दिग् बल इसे अंदर इस्तेमाल करता है, और कस्प की जगह भावों के मध्य बिंदु चाहिए हों तो यह अलग से भी काम की है।
cheshta_bala—चेष्टा बल, छह घटकों में चौथा: ग्रह के शीघ्रोच्च और उसके वास्तविक व मध्यम भोगांश के औसत का अंतर, तीन से भाग देकर — ग्रह धीमा, स्थिर या वक्री हो तो यह ज़्यादा होता है, और तेज़ी से आगे बढ़ रहा हो तो कम। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है; सूर्य और चंद्रमा का मान हमेशा 0 होता है, क्योंकि वे कभी वक्री नहीं होते।
cheshta_bala_newuse_epoch_tableचेष्टा बल की दूसरी गणना, जिसमें मध्यम भोगांश एफ़ेमेरिस से नहीं, उज्जैन 1900 युग से निकाले जाते हैं। शास्त्रीय मध्यम-गति तालिकाओं से पढ़ने के लिए `use_epoch_table` true भेजें, और उसी युग से एक-सी (रैखिक) दर लेने के लिए false। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य और चंद्रमा हमेशा 0। इसे `cheshta_bala` से तुलना के लिए इस्तेमाल करें; दोनों के नतीजे जानबूझकर पूरी तरह एक नहीं हैं।
cheshta_rashmi—चेष्टा रश्मि, यानी ग्रह की गति के कारण निकलने वाली किरणें। यह चेष्टा बल से निकाली जाती है और किरणों में बदलने से पहले 0–180 की सीमा में लाई जाती है। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक। स्रोत कोड में इसे प्रायोगिक बताया गया है, और यह भरोसेमंद नतीजों के लिए नहीं बनी है।
dig_bala—दिग् बल, छह घटकों में तीसरा: हर ग्रह उस भाव मध्य से कितनी दूर है जहाँ वह बलहीन माना जाता है — सूर्य और मंगल के लिए चौथा, चंद्रमा और शुक्र के लिए दसवाँ, बुध और बृहस्पति के लिए सातवाँ, शनि के लिए पहला भाव — और इस दूरी को तीन से भाग दिया जाता है। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक, दो दशमलव स्थानों तक पूर्णांकित।
drekkana_bala—पंचवर्गीय बल के लिए द्रेष्काण बल: D3 कुंडली में स्वराशि में बैठे ग्रह को 10 विरूप, मित्र राशि में 5 और शत्रु राशि में 2.5। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक। `drekkana_bala_simple` में नियम यही है, पर D3 स्थिति सीधे भोगांश से निकाली जाती है।
drekkana_bala_simple—द्रेष्काण बल, जिसमें D3 स्थिति बनी हुई D3 कुंडली से नहीं, सीधे भोगांश से (भोगांश गुणा तीन) निकाली जाती है: स्वराशि में 10 विरूप, मित्र राशि में 5, शत्रु राशि में 2.5। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक। `pancha_vargeeya_bala` यही रूप इस्तेमाल करती है।
dreshkon_bala—द्रेष्काण बल: पुरुष ग्रह (सूर्य, मंगल, बृहस्पति) राशि के पहले तिहाई भाग में हो, बुध या शनि बीच के तिहाई में, और चंद्रमा या शुक्र आख़िरी तिहाई में, तो 15 विरूप; वरना 0। सूर्य से शनि तक 0 या 15 के सात मान लौटाती है।
drik_bala—दृग् बल: हर ग्रह की हर दूसरे ग्रह पर दृष्टि को उनके बीच के कोण के हिसाब से अंक मिलते हैं; शुभ दृष्टियाँ जोड़ी जाती हैं, पाप दृष्टियाँ घटाई जाती हैं, और शुद्ध योग को चार से भाग दिया जाता है। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक, जो ऋणात्मक भी हो सकती हैं — जिस ग्रह पर पाप ग्रहों की भारी दृष्टि हो, उसका बल यहाँ घटता है।
dwadhasa_vargeeya_bala—द्वादशवर्गीय बल: हर ग्रह को D1 से D12 तक की बारह वर्ग कुंडलियों में देखा जाता है, और जिस कुंडली में वह मित्र या उससे बेहतर राशि में पड़े, उसके लिए एक अंक मिलता है। एक ऑब्जेक्ट लौटाती है, जिसकी keys सूर्य से शनि तक `"0"` से `"6"` हैं, और हर वैल्यू 0 से 12 तक का पूर्णांक है — यानी सीधी गिनती कि कितने वर्गों में ग्रह अच्छी स्थिति में है।
get_planet_mean_longitudeplanet_indexदिए गए क्षण पर किसी ग्रह का मध्यम भोगांश, जो उज्जैन 1900 युग पर उसकी मध्यम स्थिति और दैनिक दर से, हर वर्ष के संशोधन के साथ निकाला जाता है। सूर्य से शनि तक के लिए `planet_index` में 0 से 6 भेजें। अंशों में 0 से 360 तक की एक संख्या लौटाती है — सिवाय चंद्रमा (इंडेक्स 1) के, जिसकी गणना लिखी नहीं गई है और जो 0.0 लौटाता है। मध्यम भोगांश चेष्टा बल की गणना में लगता है; यह ग्रह की वास्तविक स्थिति नहीं है।
get_planet_mean_longitude_using_epoch_tableplanet_indexवही मध्यम भोगांश जो `get_planet_mean_longitude` देती है, पर रैखिक दर से नहीं, शास्त्रीय उज्जैन 1900 मध्यम-गति तालिकाओं से अंक-दर-अंक पढ़कर। सूर्य से शनि तक के लिए `planet_index` में 0 से 6 भेजें। अंशों में 0 से 360 तक की एक संख्या लौटाती है; चंद्रमा के लिए यहाँ भी 0.0। नतीजे रैखिक तरीके से थोड़े अलग आते हैं; `cheshta_bala_new` से आप दोनों में से कोई भी तरीका चुन सकते हैं।
hadda_bala—हद्दा बल, मिस्री हद्दा (Egyptian terms) पर आधारित: हर राशि पाँच असमान हिस्सों में बँटी है और हर हिस्से का एक ग्रह स्वामी है; ग्रह को अपनी हद्दा में 15 विरूप, मित्र की हद्दा में 7.5 और शत्रु की हद्दा में 3.75 मिलते हैं। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक।
hadda_bala_simple—हद्दा बल, जो सीधे हर ग्रह के भोगांश और हद्दा तालिकाओं से निकाला जाता है — अपनी हद्दा में 15 विरूप, मित्र की में 7.5, शत्रु की में 3.75। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक। `pancha_vargeeya_bala` असल में यही रूप इस्तेमाल करती है; `hadda_bala` से अलग, इसमें कोई कुंडली भेजनी नहीं पड़ती।
harsha_bala—हर्ष बल, ताजिक में इस्तेमाल होने वाला “हर्ष (आनंद) का बल”: चार में से हर शर्त पूरी होने पर ग्रह को 5 अंक मिलते हैं — अपने हर्ष भाव में होना, स्वराशि या मित्र राशि में होना, अपने लिंग से मेल खाती राशि में होना, और दिन के उस आधे हिस्से (दिन या रात) में होना जो उसके स्वभाव से मेल खाता है। एक ऑब्जेक्ट लौटाती है, जिसकी keys सूर्य से शनि तक `"0"` से `"6"` हैं, और हर वैल्यू 0 से 20 तक का पूर्णांक है, 5 के अंतर पर।
hora_bala—होरा बल: दिए गए क्षण पर चल रही होरा के स्वामी ग्रह को 60 विरूप मिलते हैं, बाकी सभी ग्रहों को शून्य। सूर्य से शनि तक सात मान लौटाती है, जिनमें ठीक एक मान शून्य से अलग होता है।
ishta_phala—इष्ट फल, यानी ग्रह कितना शुभ फल दे सकता है, इसका माप। यह गणना इसे जन्म कुंडली में ग्रह की गरिमा से आँकती है: उच्च के लिए 60, मूलत्रिकोण के लिए 45, स्वराशि के लिए 30, और फिर राशि स्वामी से ग्रह के संबंध के हिसाब से 22, 15, 8, 4 या 2। सात पूर्णांक लौटाती है, सूर्य से शनि तक। ध्यान दें कि शास्त्रीय परिभाषा में इष्ट फल उच्च बल और चेष्टा बल से निकाला जाता है, इसलिए ये आँकड़े उस तरीके पर चलने वाले ग्रंथ से मेल नहीं खाएँगे।
kaala_bala—काल बल, नौ उप-घटकों का योग: नतोन्नत, पक्ष, त्रिभाग, अब्द, मास, वार, होरा, अयन और युद्ध बल। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक, दो दशमलव स्थानों तक पूर्णांकित। हर उप-घटक अपनी अलग key के रूप में उपलब्ध है।
kendra_bala—भाव के प्रकार के हिसाब से केंद्र बल: केंद्र (1, 4, 7, 10) में 60 विरूप, पणफर (2, 5, 8, 11) में 30 और आपोक्लिम (3, 6, 9, 12) में 15। सूर्य से शनि तक 60, 30 या 15 के सात मान लौटाती है। संदर्भ लग्न आपके भेजे `asc_house` से नहीं लिया जाता, बल्कि अंदर ही सूर्योदय के समय सूर्य की स्थिति से निकाला जाता है।
kendrasasc_house`asc_house` में भेजे गए लग्न से गिने गए चार केंद्र भाव: चार राशि इंडेक्स की फ़्लैट सूची, 0 से शुरू (zero-based), भाव 1, 4, 7 और 10 के लिए। /api/astro/house_hora/ की `kendras` key से इसके दोनों फ़र्क ध्यान रखें: वह 1 से शुरू (one-based) संख्याओं की बारह पंक्तियाँ लौटाती है और कोई आर्ग्युमेंट नहीं लेती।
kshetra_bala—क्षेत्र बल, ताजिक पंचवर्गीय बल का पहला घटक, जो जन्म कुंडली पर आँका जाता है: स्वराशि में ग्रह को 30 विरूप, अधिमित्र की राशि में 22.5, मित्र की में 15, सम की में 7.5 और शत्रु की में 3.75। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक।
masa_bala—मास-स्वामी बल: महीने के स्वामी ग्रह को 30 विरूप मिलते हैं, बाकी को शून्य। सूर्य से शनि तक सात मान लौटाती है, जिनमें ठीक एक मान 30 होता है। `abda_bala` की तरह, यह गणना भी स्वामी को `date_time` के वार से चुनती है, जबकि `masadhipathi` उसे बीते दिनों से निकालती है।
masadhipathi—महीने का स्वामी, जो वार से नहीं, अहर्गण से निकाला जाता है। स्वामी ग्रह को 30 विरूप मिलते हैं, बाकी को शून्य। सूर्य से शनि तक सात मान लौटाती है, जिनमें ठीक एक मान 30 होता है। `masa_bala` की जगह इसी का इस्तेमाल करें।
naisargika_bala—नैसर्गिक बल: चमक के आधार पर ग्रहों का एक तय क्रम, जो किसी भी कुंडली में नहीं बदलता: सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि के लिए 60.00, 51.43, 17.14, 25.71, 34.29, 42.86 और 8.57 विरूप। यही सात स्थिर मान लौटाती है। यह इसलिए शामिल है क्योंकि षड्बल इसे छह बलों में गिनता है।
nathonnath_bala—दिवा-रात्रि बल (नतोन्नत बल), काल बल का पहला हिस्सा: स्थानीय मध्यरात्रि से मापा जाने वाला बल। दिन चढ़ने के साथ यह सूर्य, बृहस्पति और शुक्र को मिलता है, और रात गहराने के साथ चंद्रमा, मंगल और शनि को; बुध को हमेशा पूरे 60 मिलते हैं, क्योंकि वह हर समय बली है। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक।
navamsa_bala—पंचवर्गीय बल के लिए नवांश बल: D9 कुंडली में स्वराशि में बैठे ग्रह को 5 विरूप, मित्र राशि में 2.5 और शत्रु राशि में 1.25। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक। `navamsa_bala_simple` में नियम यही है, पर D9 स्थिति सीधे भोगांश से निकाली जाती है।
navamsa_bala_simple—नवांश बल, जिसमें D9 स्थिति बनी हुई D9 कुंडली से नहीं, सीधे भोगांश से (भोगांश गुणा नौ) निकाली जाती है: स्वराशि में 5 विरूप, मित्र राशि में 2.5, शत्रु राशि में 1.25। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक। `pancha_vargeeya_bala` यही रूप इस्तेमाल करती है।
ojayugama_bala—ओज-युग्म बल: जन्म कुंडली में विषम राशि में होने पर 15 विरूप, और नवांश में भी विषम राशि में होने पर 15 और; चंद्रमा और शुक्र के लिए जाँच उलटी है, क्योंकि उन्हें सम राशि चाहिए। सूर्य से शनि तक 0, 15 या 30 के सात पूर्णांक लौटाती है।
paksha_bala—पक्ष बल, जो सूर्य और चंद्रमा की कोणीय दूरी को तीन से भाग देकर निकलता है: शुभ ग्रहों को यही अंक मिलता है और पाप ग्रहों को 60 में से इसे घटाकर, इसलिए शुक्ल पक्ष शुभ ग्रहों के पक्ष में रहता है और कृष्ण पक्ष पाप ग्रहों के। फिर चंद्रमा का मान दोगुना किया जाता है, इसीलिए वह 60 से ऊपर जा सकता है। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक।
panapharasasc_houseचार पणफर भाव — 2रा, 5वाँ, 8वाँ और 11वाँ — `asc_house` में भेजे गए लग्न भाव से गिनकर। चार पूर्णांक लौटाती है: n = 2, 5, 8 और 11 के लिए `(asc_house + n - 1) mod 12`, इसलिए नतीजे 0 से शुरू (zero-based) राशि इंडेक्स हैं और `asc_house` में आपने जो भी परिपाटी अपनाई हो, उसी पर चलते हैं। इन भावों में ग्रह मध्यम फल देने वाले माने जाते हैं — केंद्रों और आपोक्लिम भावों के बीच के।
pancha_vargeeya_bala—ताजिक पंचवर्गीय बल, जो वार्षिक कुंडलियों में इस्तेमाल होता है: क्षेत्र, उच्च, हद्दा, द्रेष्काण और नवांश बल का औसत। क्षेत्र बल में स्वराशि वाले ग्रह को 30, अधिमित्र की राशि में 22.5, मित्र की में 15, सम की में 7.5 और शत्रु की में 3.75 मिलते हैं; द्रेष्काण और नवांश बल इसी सिद्धांत पर 10 और 5 में से आँके जाते हैं, और हद्दा बल मिस्री हद्दा स्वामियों के आधार पर 15 में से। एक ऑब्जेक्ट लौटाती है, जिसकी keys सूर्य से शनि तक `"0"` से `"6"` हैं, और हर वैल्यू दो दशमलव स्थानों तक की संख्या है, आमतौर पर 5 से 20 के बीच।
planet_aspect_relationship_tableinclude_housesदृग् बल के पीछे का पूरा दृष्टि मैट्रिक्स: ग्रहों के हर क्रमित जोड़े के लिए, दूसरा ग्रह पहले पर जो दृष्टि डालता है उसका बल, जो दोनों के बीच की कोणीय दूरी से आँका जाता है। दो दशमलव स्थानों तक की संख्याओं का नेस्टेड ऐरे लौटाती है, जिसमें दृष्टि डालने वाले हर ग्रह की एक पंक्ति होती है। ग्रहों के अलावा बारह भाव कस्प को भी दृष्ट बिंदुओं के रूप में कॉलम में जोड़ने के लिए `include_houses` true भेजें।
sapthavargaja_bala—सप्तवर्गज बल: हर ग्रह को D1, D2, D3, D7, D9, D12 और D30 में इस आधार पर अंक मिलते हैं कि वह अपने मूलत्रिकोण में है, स्वराशि में है, या मित्र, सम या शत्रु राशि में, और सातों अंक जोड़ दिए जाते हैं। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक।
shad_bala—पूरी षड्बल गणना। नौ आइटम का ऐरे लौटाती है: स्थान, काल, दिग्, चेष्टा, नैसर्गिक और दृग् घटक, हर एक विरूप में सात संख्याओं की सूची; फिर विरूप में कुल योग; फिर वही योग रूप में (विरूप को 60 से भाग देकर); फिर हर ग्रह के रूप को उसकी शास्त्रीय ज़रूरत से भाग देकर मिला अनुपात — सूर्य से शनि तक यह ज़रूरत 5, 6, 5, 7, 6.5, 5.5 और 5 है। असल में यही आख़िरी सूची पढ़नी चाहिए — 1 से ऊपर हो तो ग्रह ने अपनी ज़रूरत पूरी कर ली।
sthana_bala—स्थान बल, छह बलों में पहला: उच्च, सप्तवर्गज, ओज-युग्म, केंद्र और द्रेष्काण बल का योग। विरूप में सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक, दो दशमलव स्थानों तक पूर्णांकित। कुल योग किन हिस्सों से बना, यह देखना हो तो पाँचों घटक अलग-अलग माँगें।
subha_rashmi—शुभ रश्मि, यानी ग्रह की “शुभ किरणों” की गिनती; यहाँ इसे उसकी चेष्टा रश्मि और उच्च रश्मि के योग का चौथाई माना गया है। सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक। `cheshta_rashmi` की तरह यह भी प्रायोगिक है।
tribhaga_bala—त्रिभाग बल: दिन और रात, दोनों को तीन-तीन हिस्सों में बाँटा जाता है, और वर्तमान हिस्सा जिस ग्रह के अधिकार में हो, उसे 60 विरूप मिलते हैं। बृहस्पति को हर हाल में 60 मिलते हैं। सूर्य से शनि तक 0 या 60 के सात मान लौटाती है।
uccha_rashmi—उच्च रश्मि, यानी ग्रह के उच्च होने से निकलने वाली किरणें: परम नीच बिंदु से उसकी दूरी को 0–180 की सीमा में लाकर उसमें 30 जोड़ा जाता है, फिर 2 से गुणा करके 30 से भाग देकर किरणों में बदला जाता है। सूर्य से शनि तक लगभग 2 से 14 के बीच की सात संख्याएँ लौटाती है, एक दशमलव स्थान तक पूर्णांकित।
uchcha_bala—उच्च बल: हर ग्रह अपने परम नीच बिंदु से कितनी दूर है; पैमाना ऐसा है कि ठीक परम उच्च अंश पर बैठे ग्रह को 20 और ठीक परम नीच अंश पर बैठे ग्रह को 0 मिले। विरूप में 0 से 20 तक की सात संख्याएँ लौटाती है, सूर्य से शनि तक।
vaara_bala—वार-स्वामी बल: सप्ताह के दिन (वार) के स्वामी ग्रह को 45 विरूप मिलते हैं, बाकी को शून्य। सूर्य से शनि तक सात मान लौटाती है, जिनमें ठीक एक मान 45 होता है। `vaaradhipathi` यही मान बीते दिनों की गिनती से निकालती है, और दिन मध्यरात्रि पर नहीं, सूर्योदय पर बदलती है।
vaaradhipathi—वार का स्वामी, जो अहर्गण से निकाला जाता है; दिन मध्यरात्रि पर नहीं, सूर्योदय पर बदलता है, इसलिए सूर्योदय से पहले का क्षण पिछले दिन के स्वामी का ही रहता है। स्वामी ग्रह को 45 विरूप मिलते हैं, बाकी को शून्य। सूर्य से शनि तक सात मान लौटाती है, जिनमें ठीक एक मान 45 होता है। `vaara_bala` की जगह इसी का इस्तेमाल करें।
yuddha_bala—ग्रह युद्ध बल। जब दो ग्रह बहुत पास हों, तो जिसका कुल जमा बल ज़्यादा हो, वह विजेता माना जाता है; दोनों के कुल बल के अंतर को उनके दिखने वाले बिंब व्यासों के अंतर से भाग दिया जाता है, और यह मान विजेता में जोड़ा और हारे हुए ग्रह से घटाया जाता है। सूर्य से शनि तक सात संख्याएँ लौटाती है; ज़्यादातर शून्य होती हैं, और जहाँ युद्ध मिले वहाँ एक धनात्मक और उतनी ही ऋणात्मक संख्या का जोड़ा होता है। सूर्य या चंद्रमा वाले युद्ध छोड़ दिए जाते हैं।

उदाहरण अनुरोध

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  -H "X-API-Key: $OCCULT_API_KEY" \
  -H "Content-Type: application/json" \
  -d '{"keys":["harsha_bala"],"date_time":"2025-03-27T11:11:24.366Z","latitude":26.9124,"longitude":75.7873,"timezone":5.5,"asc_house":2}'

उत्तर

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    }
  },
  "status": 200,
  "is_error": false,
  "message": "successful"
}

ऊपर वाले अनुरोध से ही की गई असली कॉल का उत्तर। नतीजे data के अंदर हैं, हर नतीजा उसी नाम से जिससे आपने माँगा।

त्रुटियाँ

कुंजी और क्रेडिट की जाँच से आई त्रुटियाँ { "error": "…", "message": "<code>", "is_error": true } रूप में आती हैं। लोगों को error दिखाएँ और कोड में message देखकर फ़ैसला करें। पूरी सूची त्रुटि संदर्भ में है।